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इनकम टैक्स कैलकुलेटर भारत (FY 2026-27)

अपनी सैलरी डालें और FY 2026-27 के लिए नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में अपना इनकम टैक्स साथ-साथ देखें — ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन, ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ़्री बनाने वाली छूट (रिबेट), सरचार्ज, 4% सेस, आपके मासिक TDS और यह जानकारी कि कौन-सी व्यवस्था आपका ज़्यादा पैसा बचाती है।

1आपकी आय

किसी भी डिडक्शन से पहले साल भर की आपकी कुल टैक्स योग्य सैलरी — बेसिक, DA, HRA, भत्ते और बोनस (आपका CTC, एम्प्लॉयर के PF हिस्से को घटाकर)।

ज़रूरी नहीं। बचत खाते और FD का ब्याज, किराया और दूसरी आय जिस पर स्लैब दर लगती है। कैपिटल गेन न जोड़ें — उनकी दरें अलग हैं।

नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। सैलरी पाने वाले लोग हर साल रिटर्न भरते समय पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं।

2मकान किराया भत्ता (HRA) (सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था)

ज़रूरी नहीं। सिर्फ़ HRA छूट के लिए चाहिए।

ज़रूरी नहीं। आपकी सैलरी स्लिप पर मकान किराया भत्ता, पूरे साल का।

ज़रूरी नहीं। जो किराया आप असल में देते हैं। किराया न हो तो HRA छूट नहीं मिलती।

3डिडक्शन (सिर्फ़ पुरानी व्यवस्था)

ज़रूरी नहीं। EPF, PPF, ELSS, जीवन बीमा, होम लोन का मूलधन, बच्चों की ट्यूशन फ़ीस…

ज़रूरी नहीं। ₹25,000 तक, या आपकी उम्र 60 या ज़्यादा हो तो ₹50,000 तक।

ज़रूरी नहीं। ₹25,000 तक, या माता-पिता में से कोई 60 या ज़्यादा का हो तो ₹50,000 तक।

ज़रूरी नहीं। 80C सीमा के ऊपर अतिरिक्त NPS योगदान।

ज़रूरी नहीं। जिस घर में आप रहते हैं, उसके लोन पर साल में दिया गया ब्याज।

ज़रूरी नहीं। जैसे 80E एजुकेशन लोन ब्याज, 80G दान, 80TTA बचत ब्याज, प्रोफ़ेशनल टैक्स।

आपके नतीजे

आपके नतीजे यहाँ दिखेंगे

ख़ाली बॉक्स में अपने नाप डालें। अभी इनकी ज़रूरत है:

  • सालाना कुल (ग्रॉस) सैलरी (₹)
  • मुफ़्त
  • साइन-अप की ज़रूरत नहीं
  • PDF और CSV

भारत में अपना इनकम टैक्स कैसे निकालें?

  1. 1अपनी सालाना या मासिक ग्रॉस सैलरी और कोई दूसरी आय डालें।
  2. 2अपना उम्र-वर्ग और जिस व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उसे चुनें।
  3. 3पुरानी व्यवस्था के लिए अपने HRA, 80C, 80D, NPS और होम लोन के आँकड़े जोड़ें (नई व्यवस्था इन्हें नहीं गिनती)।
  4. 4दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स की तुलना करें, फिर अपना मासिक TDS और हाथ में आने वाली सैलरी देखें।

FY 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब क्या हैं? (नई और पुरानी व्यवस्था)

  1. 01नई व्यवस्था: टैक्स योग्य आय = सैलरी − ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन + दूसरी आय
  2. 02स्लैब (नई): 0–4L 0% · 4–8L 5% · 8–12L 10% · 12–16L 15% · 16–20L 20% · 20–24L 25% · 24L से ऊपर 30%
  3. 03छूट (नई): टैक्स योग्य आय ₹12,00,000 तक → टैक्स शून्य (₹60,000 तक की छूट); उससे थोड़ा ऊपर, टैक्स ≤ ₹12 लाख से ऊपर वाली आय
  4. 04पुरानी व्यवस्था: टैक्स योग्य = सैलरी − ₹50,000 − HRA छूट − 80C − 80D − 80CCD(1B) − होम लोन ब्याज; स्लैब 0–2.5L 0% · 2.5–5L 5% · 5–10L 20% · 10L से ऊपर 30% (₹5 लाख तक ₹12,500 तक की छूट)
  5. 05सरचार्ज ₹50L से ऊपर 10% · ₹1Cr 15% · ₹2Cr 25% · ₹5Cr 37% (नई व्यवस्था में अधिकतम 25%), मार्जिनल रिलीफ़ के साथ
  6. 06कुल टैक्स = (स्लैब टैक्स − छूट + सरचार्ज) × 1.04 (4% हेल्थ और एजुकेशन सेस)

भारत में आय पर टैक्स स्लैब में लगता है: हर दर सिर्फ़ आपकी आय के उस हिस्से पर लगती है जो उस स्लैब के अंदर आता है। FY 2025-26 से नई व्यवस्था में स्लैब चौड़े हो गए हैं, और बजट 2026 ने FY 2026-27 के लिए इन्हें बनाए रखा। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन और ₹60,000 तक की छूट के साथ, नई व्यवस्था में ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगता।

पुरानी व्यवस्था में दरें ऊँची हैं, लेकिन आप 80C (₹1.5 लाख), 80D हेल्थ इंश्योरेंस, NPS, HRA और होम लोन ब्याज जैसे डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह तभी फ़ायदेमंद है जब ये डिडक्शन बड़े हों — इसीलिए यह कैलकुलेटर दोनों का हिसाब लगाकर बताता है कि कौन-सी सस्ती है।

1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट 2025 ने 1961 के एक्ट की जगह ले ली है: छूट अब धारा 156 में है (पहले 87A थी) और नई व्यवस्था की दरें धारा 202 में हैं, लेकिन रकम वही है। FY 2026-27 से HRA के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद भी मेट्रो शहर गिने जाते हैं। बहुत ऊँची आय पर सरचार्ज लगता है, और मार्जिनल रिलीफ़ यह पक्का करता है कि किसी सीमा को पार करने पर बढ़ा टैक्स अतिरिक्त आय से ज़्यादा न हो।

FY 2026-27 के लिए इनकम टैक्स निकालने का उदाहरण

15,00,000 सालाना सैलरी, 80C में 1,50,000, 25,000 हेल्थ इंश्योरेंस और HRA के साथ, नई व्यवस्था में टैक्स 97,500 और पुरानी व्यवस्था में 1,46,640 बनता है।

नई व्यवस्था से साल में 49,140 बचते हैं; मासिक TDS लगभग 8,125 है।

काम की बातें

  • ज़्यादातर सैलरी पाने वाले लोग अब नई व्यवस्था में कम टैक्स देते हैं — पुरानी व्यवस्था तभी आज़माएँ जब आपके 80C, HRA, 80D और होम लोन के डिडक्शन मिलकर कई लाख हों।
  • साल की शुरुआत में ही एम्प्लॉयर को बता दें कि आप कौन-सी व्यवस्था चाहते हैं ताकि मासिक TDS सही कटे; रिटर्न भरते समय भी आप बदल सकते हैं।
  • ₹12 लाख की टैक्स योग्य आय से थोड़ा ऊपर, मार्जिनल रिलीफ़ आपका टैक्स ₹12 लाख से ऊपर वाली आय से ज़्यादा नहीं होने देता।
  • किराए की रसीदें और निवेश के सबूत संभालकर रखें — पुरानी व्यवस्था में इनकी ज़रूरत पड़ती है।

भारत में इनकम टैक्स — आम सवाल

क्या FY 2026-27 में ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ़्री है?

हाँ, नई व्यवस्था में। ₹12,00,000 तक की टैक्स योग्य आय पर ₹60,000 तक की छूट मिलती है, इसलिए टैक्स शून्य है। सैलरी पाने वाले को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है, इसलिए ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं लगता। कैपिटल गेन जैसी विशेष दर वाली आय पर यह छूट नहीं मिलती।

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में कौन-सी बेहतर है?

यह आपके डिडक्शन पर निर्भर है। नई व्यवस्था में दरें कम हैं और ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन है, लेकिन लगभग कोई दूसरा डिडक्शन नहीं। पुरानी व्यवस्था तभी जीतती है जब HRA, 80C, 80D, NPS और होम लोन ब्याज मिलकर बड़े हों। यह कैलकुलेटर आपके आँकड़ों पर दोनों का हिसाब लगाता है।

15 लाख की सैलरी पर कितना टैक्स लगता है?

नई व्यवस्था में टैक्स योग्य आय ₹14,25,000 है: पहले ₹12 लाख पर ₹60,000 और ₹2,25,000 का 15% (₹33,750) = ₹93,750, साथ में 4% सेस = ₹97,500 सालाना, यानी लगभग ₹8,125 महीना।

क्या बजट 2026 ने इनकम टैक्स स्लैब बदले?

नहीं। बजट 2026 (1 फ़रवरी 2026) ने FY 2025-26 के स्लैब, ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और ₹12 लाख की छूट सीमा बनाए रखी। नया इनकम-टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ, नए धारा नंबरों के साथ लेकिन वही रकम।

सैलरी पर TDS कैसे निकाला जाता है?

आपका एम्प्लॉयर आपकी चुनी व्यवस्था में पूरे साल के टैक्स का अंदाज़ा लगाता है, फिर हर महीने उसका लगभग बारहवाँ हिस्सा काटता है। अगर आपकी आय या निवेश बदलते हैं, तो बाद के महीनों में इसे ठीक किया जाता है।

मार्जिनल रिलीफ़ क्या है?

यह आय में छोटी-सी बढ़त से टैक्स में बड़ी छलांग को रोकता है। ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर (नई व्यवस्था), आपका टैक्स ₹12 लाख से ऊपर वाली आय से ज़्यादा नहीं हो सकता; सरचार्ज की सीमाओं (₹50 लाख, ₹1 करोड़…) पर टैक्स और सरचार्ज अतिरिक्त आय से ज़्यादा नहीं बढ़ सकते।

स्रोत

फ़ॉर्मूले की पिछली जाँच: 30 सितंबर 2026 ·हम फ़ॉर्मूले कैसे जाँचते हैं